बचपन

बचपन

गिरते आँसू संग लबो को हँसना होगा,
ढलते सूरज संग सवेरे को उगना होगा,
जिंदा रखो नन्हा सा बच्चा खुद के भीतर,
चलते समय संग खुद को ढलना होगा।

तन्हाइयो में भी खुद को मुस्कुराना होगा,
ऊँचाइयो में भी खुद को सम्भलना होगा,
हर पल जिये जी भरके, बचपन की तरह,
पहाड़ियों में भी खुद को चलना होगा।

#जयेश केलर

Comments