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बचपन

बचपन गिरते आँसू संग लबो को हँसना होगा, ढलते सूरज संग सवेरे को उगना होगा, जिंदा रखो नन्हा सा बच्चा खुद के भीतर, चलते समय संग खुद को ढलना होगा। तन्हाइयो में भी खुद को मुस्कुराना होगा, ऊँचाइयो में भी खुद को सम्भलना होगा, हर पल जिये जी भरके, बचपन की तरह, पहाड़ियों में भी खुद को चलना होगा। #जयेश केलर

क्यों???

             क्यों??? क्यों किसीको लटकाना पडे? क्यो किसीको पछताना पड़े? हर नारी के सम्मान में झुके हम क्यो किसीको शरमाना पड़े? कीड़े को पनपने ना दे खुद में, क्यो किसीको जल्लाना पड़े? हर जगह वह सुरक्षित महसूस करे, क्यो किसीको डरना पड़े? आओ हम समानता की ओर बढ़े, क्यो किसीको मुँह ढकना पड़े? हर घर मे हो संस्कारो की शिक्षा, क्यो किसीको बहकना पड़े? इंसान है तो इंसानियत रखे, क्यो किसीको समजाना पड़े? #जयेश केलर

वरना लटक जाओगे

               वरना लटक जाओगे हवस के किडे ,सुधर जाओ वरना लटक जाओगे, गंदगी निकाल दो दिमाग से,वरना लटक जाओगे। वो माँ है ,वो बहन है, वो किसीकी जान है, इज्ज़त करो हर नारी की, वरना लटक जाओगे।

મારી વહાલસોયી-मेरी लाडली

ટહુકતું વન એટલે મારી વહાલસોયી, હરખાતું મન એટલે મારી વહાલસોયી, અવર્ણીનિય આનંદ, અનુભૂતિ આહલાદક, જાગતું સપન ,એટલે મારી વ્હાલસોયી. જીદ ગુસ્સો હક અને બાદશાહી ઠાઠ, ચાલતું શાસન એટલે મારી વહાલસોયી. તપીશ સમંદર ની જેમ ઉંચે લઇ જવા, વરસતું ગગન એટલે મારી વહાલસોયી. કિલિયારી ઓ કેદ થાતી મારા આલ્બમ માં, મહેકતું ઉપવન એટલે મારી વહાલસોયી.  गुंजन करता वन,मतलब मेरी लाडली, ख़ुशी महसूस करता मन,मतलब मेरी लाडली। अवर्णित आनंद,अकल्पनीय अनुभूति, जीता जागता सपन, मतलब मेरी लाडली। जिद,गुस्सा, हक,और बादशाही ठाठ, जिसका चलता शासन, मतलब मेरी लाड़ली। उड़ने ऊपर ,तप्त हो जाऊ समंदर की तरह , बरसता गगन, मतलब मेरी लाड़ली। किलियारी कैद करु अल्बम में मेरे, महकता उपवन,मतलब मेरी लाड़ली। #जयेश केलर